Friday, April 19, 2019

मुकेश अंबानी कांग्रेस प्रत्याशी मिलिंद देवड़ा के समर्थन में आए

रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने कांग्रेस नेता मिलिंद देवड़ा के समर्थन में बयान दिया है. मिलिंद देवड़ा दक्षिणी मुंबई लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे हैं.

मिलिंद ने एक वीडियो ट्वीट किया है और उस वीडियो में मुकेश अंबानी उनके समर्थन में बोलते दिख रहे हैं. एक तरफ़ मुकेश अंबानी चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन कर रहे हैं तो दूसरी तरफ़ उनके छोटे भाई अनिल अंबानी पर कांग्रेस प्रमुख राहुल गांधी जमकर निशाना साध रहे हैं.

मुकेश अंबानी ने इस वीडियो में कहा है, ''मिलिंद दक्षिणी मुंबई के ही हैं...मिलिंद को दक्षिणी बॉम्बे के समाज, अर्थशास्त्र और संस्कृति का गहरा ज्ञान है.''

अपने ट्वीट में मिलिंद ने लिखा है, ''छोटे दुकानदार से बड़े उद्योगपति तक- दक्षिणी मुंबई में सबके कारोबार का ज़रिया. दक्षिणी मुंबई में हमें कारोबार को फिर से पटरी पर लाना है और नौकरियां पैदा करनी हैं. युवा हमारी प्राथमिकता में हैं.''

मिलिंद देवड़ा ने कहा है, ''मुझे पता है कि मुकेश अंबानी और उदय कोटक का समर्थन बाक़ियों के समर्थन की तुलना में लोगों का ध्यान ज़्यादा आकर्षित करेगा. मुझे इनके समर्थन पर गर्व है लेकिन उतना ही गर्व पानवाले, छोटे दुकानदारों, छोटे उद्योगों के समर्थन पर भी है.'' मिलिंद देवड़ा मुकेश अंबानी की टेलीकॉम कंपनी जियो के कैंपेन में भी शामिल हुए थे.

मुकेश अंबानी के इस समर्थन की चर्चा इसलिए हो रही है क्योंकि राहुल गांधी उनके भाई पर चुनावी रैलियो में खुलकर हमला बोलते रहे हैं. राहुल गांधी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अनिल अंबानी के सहारे क्रोनी कैपिटलिज़्म को बढ़ावा देने का आरोप लगाते रहे हैं.

राहुल गांधी रफ़ाल सौदे में अनिल अंबानी को फ़ायदा पहुंचाने का आरोप लगाते रहे हैं.

मुकेश अंबानी ने पिछले महीने अपने भाई अनिल अंबानी को उनके 458.77 करोड़ रुपए का क़र्ज़ चुकाकर जेल जाने से बचाया था. अगर अनिल अंबानी एरिक्सन के इस क़र्ज़ को नहीं चुकाते तो जेल जाना पड़ता. इस बकाए को चुकाने में अपने बड़े भाई मुकेश और भाभी नीता अंबानी की मदद के लिए धन्यवाद करते हुए अनिल अंबानी ने एक बयान जारी किया था.

इस बयान में लिखा है, ''मुश्किल घड़ी में मुझे अपने परिवार से मदद मिली है. यह हमारे परिवार के मज़बूत मूल्यों को ही दर्शाता है. जिस वक़्त मुझे सबसे ज़्यादा मदद की ज़रूरत थी मेरा परिवार साथ खड़ा हुआ.''

एक वक़्त था जब दोनों भाइयों के संबंध अच्छे नहीं थे और दोनों में प्रतिद्वंद्विता थी. अनिल अंबानी ने लिखा था, ''मैं और मेरा परिवार इस बात के लिए आभारी है कि हम अतीत से निकल गए हैं. इस मदद के लिए दिल से आभार प्रकट करता हूं.''

अनिल अंबानी ने पिछले साल ही निजी तौर पर वादा किया था कि साल के अंत तक वो एरिक्सन का क़र्ज़ चुका देंगे. सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि चार हफ़्ते के भीतर अगर एरिक्सन का पैसा नहीं मिलता है तो अनिल अंबानी और उनके दो सहयोगियों को तीन महीने के लिए जेल जाना होगा.

Monday, April 15, 2019

सूडान में विद्रोह, क्या बीत रही है वहाँ भारतीयों पर

हाल के दिनों में सूडान वैश्विक ख़बरों में छाया रहा. ख़बरों में बने रहने की वजह, यहां हुए दो बड़े बदलाव. बीबीसी मराठी की जाह्नवी मुले ने सूडान की राजधानी ख़ार्तूम में रहने वाले संतोष जोशी से वहां की अनिश्चितताओं और राजनीतिक तख़्तापलट पर विस्तार से बात की.

"आज तक मैंने अपने जीवन में ऐसा कुछ नहीं देखा था. मैं कभी किसी ऐसी घटना का साक्षी नहीं बना था. मुझे लोगों में ज़िंदगी नज़र आई."

संतोष उस नज़ारे को अपने शब्दों में बांधते हुए कहते हैं "मैं लोगों के संघर्ष का साक्षी बना, मैंने उन्हें इतना खुश कभी भी नहीं देखा."

ख़ार्तूम में जो कुछ बीते दिनों हुआ उस पर चर्चा करने से पहले, ये समझ लेना ज़रूरी है कि इन सबके पीछे का घटनाक्रम क्या रहा और ये सारे घटनाक्रम भारत के लिए इतने महत्वपूर्ण क्यों हैं.

सूडान में बीते साल दिसंबर से प्रदर्शन हो रहे थे और इन प्रदर्शनों का नतीजा ये हुआ कि 11 अप्रैल साल 2019 में सूडान में एक बड़ी क्रांति के तौर पर तख़्तापलट हुआ. सूडान के पूर्व राष्ट्रपति उमर अल बशीर जोकि तीन दशक से देश की सत्ता पर काबिज़ थे, उन्हें पद छोड़ना पड़ा.

अब सेना का कहना है कि वो आने वाले दो सालों तक देश संभालेंगे और उसके बाद कहीं जाकर देश में ऐसी स्थिति बन सकेगी जिसमें चुनाव कराए जा सकें. लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी मांग पर अड़े रहे और लोकतंत्र की मांग करते रहे जिसके बाद तख़्तापलट के नेता अवाद इब्न औफ़ को भी अपना पद छोड़ना पड़ा.

सूडान की स्थिति भारतीय नज़र से

इन सारे घटनाक्रमों के बीच, सूडान में रहने वाले भारतीय चाहते हैं कि मुल्क़ में जल्द से जल्द शांति हो जाए. प्राचीन समय से इस देश का भारत से पुराना ऐतिहासिक, राजनैतिक और आर्थिक रिश्ता रहा है.

भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुमान के अनुसार, लगभग पंद्रह सौ भारतीय मूल के लोग पीढ़ियों से सूडान में रह रहे हैं. इसके अलावा कई भारतीय कंपनियों ने सूडान में पैसा लगा रखा है और बहुत से भारतीय वहां नौकरी के सिलसिले में हैं.

संतोष जोशी उन्हीं लोगों में से एक हैं. वो मुंबई के पास ठाणे के रहने वाले हैं और साल 2016 में कंपनी के काम के सिलसिले में सूडान गए थे. इससे पहले वो अपने काम की ही वजह से लगभग दस सालों तक पश्चिम अफ्रीका में भी रह चुके हैं.

वो उन हर छोटे बड़े घटनाक्रमों का ज़िक्र करते हैं जिसने सूडान में हुए इस महा-बदलाव के लिए लिए अहम भूमिका निभाई. इस क्रांति के पहले सूडान में क्या हालात थे और अब जबकि तख़्तापलट हो चुका है तो आने वाले वक़्त में उनकी उम्मीदें क्या हैं.

एक मित्र देश

"जब मैं सूडान आया था तो मेरा अनुभव बहुत ही अच्छा रहा था. यहां नवंबर में मौसम बहुत सुहावना होता है. चीज़ें बेहद सामान्य थीं. मैंने यहां के लोगों को पाया कि वो बहुत मददगार हैं और मीठा बोलने वाले हैं. यहां के लोगों ने ही मुझे यहां रहने के लिए आरामदायक महसूस कराया."

लेकिन ये सबकुछ इतना आसान भी नहीं था क्योंकि संतोष को अरबी नहीं आती, जो कि सूडान की पहली भाषा है.

वो कहते हैं "लेकिन मेरे साथियों ने मेरी बातचीत करने में मदद की. अगर सच कहूं तो मैं सूडान की सभ्यता और संस्कृति से बहुत प्रभावित हुआ."

लेकिन संतोष यह भी मानते हैं कि सूडान में हर किसी की ज़िंदगी एक-दूसरे से अलग थी.

"हमें लगता था कि हमें सुरक्षा और बिजली जैसे मसलों पर बहुत अधिक सोचने की ज़रूरत नहीं. हमें बहुत अधिक तक़लीफ़ें भी नहीं उठानी पड़ीं. लेकिन मैंने ये भी देखा कि कैसे यहां लोग सरकार के साथ अलग-अलग मुद्दों को लेकर जूझते रहे हैं."

प्रदर्शनों से पहले कैसी थी ज़िंदगी

सूडान में बीते 30 सालों से उमर अल बशीर का शासन था. साल 1989 से वो सत्ता पर काबिज़ थे लेकिन हाल के दिनों में हुए संघर्षों ने लोगों को ग़रीबी के निचले पायदान पर पहुंचा दिया था. साल 2011 में दक्षिणी सूडान के अलग होने के बाद सूडान के बहुत से तेल के ज़ख़ीरे उससे छिन गए. संतोष जोशी लोगों के बीच बढ़ती निराशा का उल्लेख करते हुए कहते हैं "लोगों में विकास की अनदेखी को लेकर, आर्थिक नीतियों को लेकर, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में लापरवाही को लेकर, भ्रष्टाचार, राजनीतिक समस्याओं और बाधाओं को लेकर नाराज़गी थी."

साल 2017 में अमरीका ने दो दशकों बाद सूडान पर लगा आर्थिक प्रतिबंध हटा दिया जिसके बाद उम्मीद की एक किरण नज़र आई. लेकिन ये उम्मीद भी बहुत अधिक दिनों तक टिक नहीं सकी.

" वे सोच रहे थे कि इस आर्थिक प्रतिबंध के हटने से विकास को प्रोत्साहन मिलेगा और आर्थिक संकट का अंत होगा. लेकिन इसके बजाय अर्थव्यवस्था ने आसमान छूती मुद्रास्फीति के साथ मंदी को जन्म दिया. लोगों के वेतन में बहुत अधिक बढ़ोत्तरी नहीं हुई और लोगों की बचत धीरे-धीरे घटने लगी. इसके बाद ही लोगों ने समस्याओं के बारे में बात करना शुरू किया. रोज़मर्रा की चीज़ों को दाम बढ़ रहे थे और लोगों की बेचैनी भी."

रोटी को लेकर शुरू हुए संघर्ष ने सिविल संघर्ष तक

रोटी के दाम धीरे-धीरे बढ़ रहे थे. वो कहते हैं "ब्रेड और बीन्स सूडीन का मुख्य आहार है और धीरे-धीरे उनकी क़ीमत बढ़ती जा रही थी. इन बढ़ती क़ीमतों ने ही आग के लिए चिंगारी का काम किया. इन बढ़ती क़ीमतों ने लोगों में कुंठा पैदा की और नाराज़गी भी. हमें उन लोगों की नाराज़गी साफ़ समझ आ रही थी जो लोग रोटी तक नहीं ख़रीद पा रहे थे."

Monday, April 8, 2019

जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाइवे पर बंदिश लगने से कश्मीर में नाराज़गी

जम्मू-कश्मीर में बारामूला-उधमपुर नेशनल हाइवे पर 31 मई तक हफ़्ते में दो दिन रविवार और बुधवार को लगने वाला ट्रैफिक बैन रविवार से लागू हो गया. सरकार ने श्रीनगर-जम्मू नेशनल हाइवे पर सप्ताह में दो दिनों के लिए आम लोगों की आवाजाही पर रोक लगाने का फ़ैसला किया है. राज्य के गृह सचिव की ओर से बुधवार को जारी इस आदेश का कश्मीर में विरोध हो रहा है.

कश्मीर के बारामूला, श्रीनगर, काजीकुंड, जवाहर टनल और बनिहाल से उधमपुर जाने वाले रास्ते सुरक्षा बलों के काफिले गुजरने के कारण बंद रहेंगे. उत्तर कश्मीर के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि हाईवे से जब सुरक्षा बलों का काफिला गुजरेगा उस दौरान ट्रैफिक को बंद करने का हमें निर्देश मिला है.

आदेश के मुताबिक यह बंदिश सुबह चार बजे से शाम पांच बजे तक जारी रहेगी.

इस प्रतिबंध का मुख्य धारा के नेता, अलगाववादी और कारोबारी समुदाय के लोग विरोध कर रहे हैं और इसे जन-विरोधी आदेश बताते हुए इस पर पुनर्विचार की मांग कर रहे हैं.

कश्मीर के आम लोग भी इसका यह कहते हुए विरोध कर रहे हैं कि इससे उनकी समस्याएं और बढ़ जाएंगी.

पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के कार्यकारी अध्यक्ष उमर अब्दुल्लाह ने कहा है कि इस प्रतिबंध की समीक्षा होनी चाहिए. उन्होंने राज्यपाल सत्यपाल मलिक से कहा है कि लोगों के लिए दिक्कतें पैदा करने वाले इस आदेश को वापस लिया जाए.

रफ़ियाबाद में पत्रकारों से बात कहते हुए अब्दुल्लाह ने कहा, "चरमपंथ के पिछले तीस सालों में सरकार ने इस तरह का आदेश कभी जारी नहीं किया. विधानसभा के पास कार बम धमाके के बाद भी नहीं. क्या यह आदेश यह दिखाता है कि कश्मीर अब तक के सबसे ख़राब दौर से गुज़र रहा है?"

उमर ने कहा कि बनीहाल से बारामूला तक सुरक्षाबल ट्रेन के माध्यम से भी आ-जा सकते हैं.

14 फ़रवरी को पुलवामा में हुए हमले के बाद भारत के गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि जिस दौरान सुरक्षा बलों के काफ़िले गुज़रेंगे, उस समय आम नागरिकों के वाहनों को चलने की इजाज़त नहीं होगी.

पुलवामा में विस्फोटकों से भरी कार सीआरपीएफ़ के काफ़िले से जा टकराई थी जिसमें 40 जवानों की मौत हो गई थी. चरमपंथी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने इस हमले की ज़िम्मेदारी ली थी. हमलावर की पहचान कश्मीरी युवक आदिल अहमद डार के रूप में हुई थी.

274 किलोमीटर लंबा श्रीनगर-जम्मू नेशनल हाइवे ही कश्मीर को बाक़ी भारत से जोड़ने वाली इकलौती सड़क है. हर रोज़ सैकड़ों और हज़ारों आम लोगों के और सुरक्षा बलों के वाहन इससे गुज़रते हैं. हर रोज़ सुरक्षा बलों के काफ़िले जम्मू से श्रीनगर और श्रीनगर से जम्मू आते-जाते रहते हैं.

सुरक्षा बलों के काफ़िले बारामूला से जम्मू आते हैं. यह हाइवे दक्षिणी कश्मीर के अनंतनाग, अवंतिपुरा, पंपोर और उत्तरी कश्मीर में पाटन और बारामूला से होकर गुज़रता है.

हज़ारों यात्री रोज़ाना इसी हाइवे के माध्यम से उत्तरी और दक्षिणी कश्मीर के बीच काम वगैरह के सिलसिले में आवागमन करते हैं.

उत्तरी कश्मीर के हिंदवाड़ा के ख़ुर्शीद अहमद कहते हैं, "आम नागरिकों की गाड़ियों पर रोक लगाने का सरकार का फ़ैसला दिखाता है कि भारत कश्मीर के लोगों को कितना प्यार करता है. वे सेना के लिए सड़क बना रहे हैं. ये बताइए कि मरीज़ अस्पताल कैसे पहुंचेंगे? लोगों को मिलना होता है, काम होते हैं. वे कैसे मंज़िल तक पहुंचेंगे? इससे लोगों के जीवन में नई समस्याओं का अंबार लग जाएगा."

अर्शिद अहमद दक्षिण कश्मीर के छात्र हैं जो कश्मीर यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करते हैं. उन्होंने बीबीसी से कहा कि भारत सरकार ने यह आक्रामक नीति अपनाई है और हम इसके ख़िलाफ़ हैं.

उन्होंने कहा, "मुझे तो इसमें समझदारी नज़र नहीं आ रही. छात्रों की बात करें तो उन्हें मुश्किल होगी. छात्र पढ़ाई के लिए कई इलाक़ों से श्रीनगर आते हैं. यही एकमात्र रास्ता है. सरकार जब बुधवार और रविवार को इसे बंद कर देगी तो छात्र कोचिंग वगैरह के लिए बुधवार को कैसे जाएंगे? कश्मीर की बड़ी यूनिवर्सिटी श्रीनगर में है. ऐसे में यह आक्रामक नीति छात्रों को प्रभावित करेगी. हम पूरी तरह इसका विरोध करते हैं."

कश्मीर का कारोबारी समुदाय भी कहता है कि इस क़दम से उनका कारोबार प्रभावित होगा. वे और ज़्यादा अलग-थलग पड़ जाएंगे.

कश्मीर इकनॉमिक अलायंस (केईए) के चेयरमैन मोहम्मद यासीन ख़ान कहते हैं, "ट्रैफ़िक पर रोक लगाने से हमारा काम धंधा प्रभावित होगा. हमारा कारोबार एक तो पहले ही लगातार होने वाली हड़तालों और अन्य घटनाओं के कारण मंद चल रहा है. ऊपर से हम पूरी तरह इसी हाइवे पर आश्रित हैं. इसी के ज़रिये हम ज़रूरी साज़ोसामान लाते हैं.

मोहम्मद यासीन कहते हैं, ''हाइवे पर रोज़ वनवे ट्रैफ़िक होता है और आप हफ़्ते में इसे दो दिन बंद कर देंगे तो मतलब है कि हम तीन दिन ही चीज़ों को ला सकेंगे. 2014 में आई बाढ़ से हमारा बिज़नेस बुरी तरह प्रभावित हुआ है. अगर हमारे चौपट होते व्यापार के ऊपर इस तरह का क़दम उठाएंगे तो नतीजा क्या होगा, आप समझ सकते हैं. फिर किसी की आज़ादी पर इस तरह से बंदिश लगा देना मानवाधिकार का भी तो उल्लंघन है."

पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के चेयरमैन सजाद गनी लोन कहते हैं, "मुझे नहीं लगता कि सरकार इस तरह का ग़लत फ़ैसला ले सकती है. क्या लोगों को एक जगह से दूसरी जगह जाने का अधिकार नहीं है?"

पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष डॉक्टर फ़ारूक़ अब्दुल्लाह ने इस फ़ैसले की आलोचना करते हुए कहा कि ऐसा तो करगिल युद्ध के दौरान भी नहीं किया गया था.

नाराज़ फ़ारूक़ अब्दुल्ला ने कहा, "जम्मू-श्रीनगर हाइवे उस समय भी बंद नहीं किया गया था जब करगिल युद्ध चल रहा था और ख़ुफ़िया रिपोर्टें कह रही थीं कि आत्मघाती हमलावर कभी भी हमला कर सकते हैं. हो क्या रहा है? क्या आप कश्मीर को ब्रितानी कॉलोनी बनाना चाहते हैं?"

पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के चेयरमैन सजाद गनी लोन ने इसे जनविरोधी बताया और कहा कि इस तरह के क़दमों से कश्मीर में मानवीय संकट पैदा हो जाएगा.

जे एंड के पीपुल्स मूवमेंट के अध्यक्ष शाह फ़ैसल ने मांग की है कि इस आदेश को वापस लिया जाए.

लोगों और राजनीतिक दलों के विरोध को देखते हुए कश्मीर के डिविज़नल कमिश्नर बशीर अहमद ख़ान ने शुक्रवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा, ''निजी वाहनों पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई गई है.''

उन्होंने कहा, "डिप्टी कमिश्नर देखेंगे कि मेडिकल इमर्जेंसी होने पर, स्कूल जा रही गाड़ियों पर या फिर आपातकालीन स्थितियों में कैसे गाड़ियों को जाने देना है. यही नहीं, अगर कोई चुनाव अभियान में भी जुटा होगा तो उसे भी इजाज़त मिलेगी."

Friday, April 5, 2019

छात्र ने पूछा- 72 हजार देने के लिए फंड कहां से लाएंगे? राहुल गांधी ने दिया ये जवाब

लोकसभा चुनाव में जीत हासिल करने के लिए युवा वोटरों पर हर किसी की नज़र है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को महाराष्ट्र के पुणे में छात्रों से सीधा संवाद किया. इस दौरान कई छात्रों ने राहुल गांधी से खुलकर सवाल किए. एक छात्र ने राहुल गांधी से पूछा कि न्याय योजना का फंड कहां से आएगा. उन्होंने कहा कि हम नीरव मोदी, अनिल अंबानी, मेहुल चोकसी और विजय माल्या से पैसे लेकर गरीबों को देंगे.

दरअसल, एक छात्र ने राहुल गांधी से सवाल किया था कि आपने 20 फीसदी गरीबों को 72 हजार रुपये सालाना देने का वादा किया है. इसके लिए पैसा कहां से लाएंगे. राहुल ने कहा कि हम नीरव मोदी, मेहुल चोकसी, विजय माल्या, अनिल अंबानी से पैसा लाएंगे. किसी मिडिल क्लास के लिए टैक्स नहीं बढ़ाएंगे.

राहुल बोले कि हमने पूरा हिसाब लगा लिया है, पैसा कहां से आना है और कैसे बांटा जाना है. पहले पायलट प्रोजेक्ट होगा और उसके बाद पूरे देश में लागू किया जाएगा.

रोजगार के बारे में राहुल गांधी ने कहा कि आज हमारे देश में 27 हजार नौकरियां हर 24 घंटे में खोई जा रही हैं, वहीं चीन लगातार अपने देश में रोजगार पैदा कर रहा है. हमारे यहां स्किल को तवज्जो नहीं दी जाती है. छात्रों से संवाद करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जमकर निशाना साधा.

उन्होंने कहा कि नोटबंदी और जीएसटी जैसे फैसलों से देश की अर्थव्यवस्था को तगड़ा झटका लगा है. नोटबंदी से जो झटका लगा है उसे वापस नहीं किया जा सकता है, लेकिन हम अर्थव्यवस्था को उबारने का काम करेंगे. राहुल ने यहां कांग्रेस पार्टी के घोषणापत्र की बातें भी छात्रों के सामने रखीं.

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि हमने लोगों से बात करने के बाद ही अपने घोषणापत्र को तैयार किया है, इसके लिए किसान, महिला, जवान, युवा, बुजुर्ग सभी तबकों से बात की गई थी. आपको बता दें कि राहुल गांधी शुक्रवार को महाराष्ट्र में तीन बड़े कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे, इस संवाद के बाद उन्हें दो रैलियों को संबोधित करना है.

महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश की छह सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा की गई है. लेकिन महाराष्ट्र में बीजेपी के महत्वपूर्ण नेता किरीट सोमैया को पार्टी ने नहीं टिकट दिया गया है.

वो इसी सीट से दो बार सांसद रह चुके हैं. कहा जा रहा है कि गठबंधन की सहयोगी शिवसेना के ऐतराज़ के बाद किरीट सोमैया की जगह पार्टी ने मुंबई नॉर्थईस्ट से मनोज कोटक को टिकट दिया है.

महाराष्ट्र में मुंबई नॉर्थ ईस्ट से मनोज कोटक को, यूपी के फ़िरोज़ाबाद से चंद्र सेन, मनिपुर प्रेम सिंह शाक्या, रायबरेली से दिनेश प्रताप सिंह और मछलीशहर से वीपी सरोज को उम्मीदवार बनाया है.

बुधवार को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने असम में एक चुनावी रैली के दौरान बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को 'मर्डर एक्यूज़्ड कहा.'

सिटिजंस अमेंडमेंट बिल को लेकर उन्होंने कहा, "बीजेपी के मर्डर एक्युज़्ड प्रेसिडेंट ने कहा कि वो इस बिल को पास कर दिखाएंगे."

उन्होंने इस बिल को असम के लोगों पर आक्रमण करार दिया और वादा किया कि कांग्रेस पार्टी इसे नहीं होने देगी.

उन्होंने कहा, "हमने इस बिल को पास नहीं होने दिया और भविष्य में भी इसे पास नहीं होने देंगे."

राहुल गांधी ने कहा कि "कांग्रेस पार्टी ने असम को विशेष राज्य का दर्जा दिया था, औद्योगिक हब बनाने की योजना थी लेकिन बीजेपी ने एक के बाद एक इन चीजों को छीन लिया."

उन्होंने कहा कि "जैसे ही हमारी सरकार आएगी, विशेष दर्जा, नॉर्थ ईस्ट इंडस्ट्रियल पॉलिसी और नया प्लानिंग कमीशन आप लोगों को दिलवा देंगे."

बुधवार को ही पश्चिम बंगाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनावी रैली को संबोधित करते हुए मुख्यंत्री ममता बनर्जी को 'स्पीड ब्रेकर' कहा.

गौरतलब है कि ममता सरकार ने केंद्र की प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना को लागू न करने का फैसला किया है.

ويشرح فواز هذه النقطة بالقول

أثارت تلك الحادثة نوعا من الزخم أثناء نقاش الموضوع حينها. وبعدها بناجة أم عبد الله المة فعيكية حذت الاباحية الجنس & أنيل الجنس جمع المت...