एक जनवरी को हर साल देशभर के दलित समुदाय के लोग भीमा कोरेगांव स्थित विजय स्तंभ (युद्ध समारक) के नज़दीक इकट्ठा होते हैं.
यहां इकट्ठा होकर ये लोग तीसरे एंगलों-मराठा युद्ध में जीतने वाली महार रेजिमेंट को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं. भीमा कोरेगांव की इस लड़ाई में ईस्ट इंडिया कंपनी की महार रेजिमेंट ने मराठाओं को हरा दिया था. उस वक़्त महार समुदाय को महाराष्ट्र में अछूत समझा जाता था.
पिछले साल इस लड़ाई के दो सौ साल पूरे होने के मौक़े पर हो रहे जश्न में हिंसा भड़क गई थी. जिसकी चपेट में आस-पास के इलाक़े आए थे. हिंसा में एक व्यक्ति की मौत के बाद पूरे राज्य में ज़ोरदार प्रदर्शन हुए थे.
इस साल के आयोजन के लिए पुणे ज़िला प्रशासन ने किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोकने के लिए ख़ास इंतज़ाम किए हैं. पुणे के ज़िला कलेक्टर नवल किशोर राम ने इस बारे में जानकारी दी.
हम पिछले दो महीने से तैयारियों में जुटे हैं. हम पांच से दस लाख लोगों की भीड़ को आराम से संभाल सकते हैं.
पार्किंग के लिए 11 स्लॉट बनाए गए हैं. आयोजन में आने वाले लोगों को गाड़ियां यहीं लगानी होंगी. यहां से स्मारक तक वो हमारी गाड़ियों में जाएंगे. इसके लिए हमने 150 बसों का इंतज़ाम किया है. इसके अलावा पानी के 100 टैंक भी लगाए जाने हैं.
स्मारक और उसके पास के 7-8 किलोमीटर के इलाक़े में सीसीटीवी लगाए गए हैं. निगरानी के लिए ड्रोन कैमरों का इस्तेमाल भी किया जाएगा. भीमा कोरेगांव को जाने वाली सड़कों को दुरुस्त कर दिया गया है और जगह-जगह पर शौचालय बनाए गए हैं.
क्या पिछले साल हुई हिंसा की वजह से इलाके के लोगों में डर है?
इस बार हमने लोगों से बेहतर तालमेल किया है. डर के माहौल को ख़त्म करने के लिए हमने आस-पास के गांववालों के साथ बैठकें की हैं.
मैंने ख़ुद 15-20 बैठकें की हैं और भीमा कोरेगांव की स्थिति पर नज़र बनाए रखी है. लोग डरे हुए नहीं हैं. वो हमारा काम देखकर ख़ुश हैं.
रैली की इजाज़त किन-किन आयोजकों को मिली है?
पांच से छह आयोजकों ने रैली की इजाज़त मांगी थी. उन सब को इजाज़त दे दी गई है. इन्होंने कुछ दिन पहले इजाज़त मांगी थी और उन्हें तुरंत दे भी दी गई थी.
पिछले साल की हिंसा को देखते हुए क्या इस बार भी रैली की इजाज़त देना जोखिम भरा नहीं है?
हमने मुख्य स्थान पर रैली की इजाज़त नहीं दी है. आयोजक स्मारक से 500 मीटर की दूरी पर ही रैली कर सकेंगे.
रैली के लिए क्या कुछ शर्तें भी तय की गई हैं?
रैली में किसी तरह के भड़काऊ और विभाजनकारी भाषण देने की मनाही है. सभी आयोजकों को कोड ऑफ कंडक्ट का पालन करना होगा और अगर वो ऐसा नहीं करते, तो उनके ख़िलाफ़ तुरंत सख़्त कार्रवाई की जाएगी.
ख़बर है कि पिछले साल की हिंसा के अभियुक्त पर प्रतिबंध लगा दिया गया है.
जिन लोगों पर एक जनवरी 2018 को हुई हिंसा के मामले में केस दर्ज हुआ है, उन पर प्रतिबंध लगाया गया है.
क्या संभाजी भिड़े और मिलिंद एकबोटे पर भी प्रतिंबध लगाया गया है?
पुलिस हिंसा के अभियुक्तों पर कार्रवाई कर रही है. मेरे पास किसी ख़ास इंसान या संस्था का नाम तो नहीं है, लेकिन कोई भी अभियुक्त भीमा कोरेगांव नहीं आ सकता.
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ويشرح فواز هذه النقطة بالقول
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