Sunday, November 18, 2018

पापुआ न्यू गिनी बनेगा अमरीका के ख़िलाफ चीन का हथियार?

जो देश संरक्षणवाद की नीति अपनाते हैं, निश्चित तौर पर उनका विनाश हो जाता है."

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमरीका की 'अमरीका फर्स्ट पॉलिसी' के संदर्भ में ये बात कही. जिनपिंग ने एशिया पैसिफ़िक इकोनॉमिक कॉर्पोरेशन समिट (एपेक) के दौरान ये बयान दिया, जहां चीन और अमरीका के बीच चला आ रहा व्यापारिक गतिरोध मुख्य मुद्दा रहा.

बीते कई महीनों से दोनों देशों के बीच व्यापारिक संघर्ष चल रहा है. कभी अमरीका अपने दांव चलता है तो कभी चीन पलटवार करता है.

अमरीका का तर्क है कि उसने जो टैरिफ़ लगाए हैं वो चीन की अनुचित व्यापार नीतियों का परिणाम है.

दोनों ही देशों का कहना है कि मौजूदा टैरिफ़ अरबों डॉलर का हो चुका है और आने वाले समय में ये और भी बढ़ सकता है.

हालांकि शी जिनपिंग ने आने वाले समय में तनाव के बढ़ने को लेकर चेतावनी दी है.

उन्होंने कहा, "इतिहास टकराव से भरा पड़ा है, चाहे वो शीत युद्ध के रूप में हो, ख़ूनी जंग के तौर पर हो या फिर व्यापारिक युद्ध के रूप में लेकिन सच्चाई यही है कि युद्ध चाहे कोई भी हो, उससे कोई विजेता नहीं पैदा होता."

पापुआ न्यू गिनी की राजधानी पोर्ट मोर्सबी में हुई समिट पहली बार आधिकारिक बयान जारी किए बिना ख़त्म हो गई. मेजबान देश के प्रधानमंत्री पीटर ओ नील ने कहा कि दो बड़े देशों (चीन और अमरीका) के बीच सहमति नहीं बन सकी. चेयरमैन का बयान बाद में जारी किया जाएगा.

में शी जिनपिंग ने मौजूदा व्यापारिक हालातों के बारे में कहा कि इस तरह अड़चनें पैदा करना, आर्थिक संबंधों को तोड़ना अर्थशास्त्र के क़ानून को तोड़ना है. ये सालों से चले आ रहे व्यापारिक नियमों का उल्लंघन है.

उन्होंने कहा "ये कोई दूरगामी सोच नहीं है और निश्चित तौर पर ये विनाश का रास्ता है." चेतावनी भरे शब्दों में उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने अपने दरवाज़े बंद कर लिए हैं वे सिर्फ़ ख़ुद को दुनिया के बाकी देशों से काट रहे हैं. वे दिशा भटक चुके हैं.

जब तक चीन नहीं बदलेगा, हम भी ऐसे ही रहेंगे
लेकिन शी जिनपिंग के ठीक बाद अमरीकी उपराष्ट्रपति माइक पेंस ने कहा कि चीन टैरिफ़ की बात कर रहा है लेकिन सच्चाई यही है कि ये सिर्फ़ और सिर्फ़ उसकी अंसतुलित व्यापार नीतियों का परिणाम है.

उन्होंने कहा "अमरीका अपने तरीक़े में तब तक बदलाव नहीं लाएगा जब तक कि चीन अपनी नीतियों में बदलाव नहीं लाएगा."

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हालांकि उनका ये बयान अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के उस बयान के ठीक एक दिन बाद आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि वो पूरी तरह आश्वस्त हैं कि चीन और अमरीका के बीच डील हो जाएगी.

हालांकि उन्होंने ये ज़रूर कहा कि अगले महीने अर्जेंटीना में होने वाले जी-20 समिट को देखते हुए इस समझौते में कुछ मुख्य मुद्दों को शामिल नहीं किया गया है, जिसका मतलब ये हुआ कि राष्ट्रपति अब भी इसे पूरी तरह स्वीकार नहीं करते हैं. राष्ट्रपति ट्रंप पहले भी ऐसा ही बयान दे चुके हैं.

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